Press Note Dt: 19.05.2018 Memorandum to Bihar Gorvernor

 

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शक्तिसिंहजी गोहिल का कार्यालय,

राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं बिहार प्रभारी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी

प्रेस विज्ञप्ति                                                       १९ मई, २०१८

गेल (GAIL) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा कानून के मुताबिक निर्धारित मुआवजा दिये बिना सरकार द्वारा किसानों की जमीन का अधिग्रहण  किया जा रहा है। इस अधिग्रहण के खिलाफ किसानों की आवाज बनकर उनकी समस्या को संज्ञान में लाने के लिये बिहार प्रभारी शक्तिसिंह गोहिल, बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ कांग्रेस जन, पीड़ित किसान और कांग्रेस कार्यकर्ताओं  ने आज दिनांक 19 मई, 2018 दिन शनिवार दोपहर 02.30 बजे  सदाकत आश्रम, BPCC, पटना से पैदल चलकर बिहार के महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन दिया ।

ज्ञापन की हिंदी और इंग्लिश प्रतिलिपि और  फोटोग्राफ  प्रेसनोट के साथ संलग्न हैं।

ज्ञापन

 १९ मई, २०१८

प्रति,

महामहिम

श्री सत्य पाल मलिक

माननीय राज्यपाल, बिहार

डॉ. श्री कृष्ण सिंह पार्थ रोड,

राजबंसी नगर, पटना

बिहार – 800022

माननीय महोदय,

हम इस पत्र के माध्यम से आपका ध्यान बिहार राज्य में हाल ही में गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा कृषि भूमि के दुखद एवं बलपूर्वक किए गए अधिग्रहण की ओर ले जाना चाहते हैं।

I. पृष्ठभूमि

गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) बिहार राज्य के कैमूर; रोहतास; औरंगाबाद और गया जिलों में कृषि भूमि का अधिगृहण कर रही है। ध्यान देने वाली बात यह है कि किसानों की कृषि भूमि का अधिग्रहण गेल द्वारा पेट्रोलियम एवं मिनरल्स पाईपलाईंस (एक्विज़िशन ऑफ राईट ऑफ यूज़र इन लैंड) अधिनियम, 1962 के तहत किया जा रहा है।

II. भूमि का गैरकानूनी अधिग्रहण

हम आपको तीन मुख्य मुद्दों से अवगत कराना चाहते हैं, जिनका सामना बिहार के बताए गए जिलों में गेल द्वारा कृषि भूमि के बलपूर्वक अधिग्रहण के मामले में बिहार के किसान कर रहे हैं ।

A. अधिग्रहीत की जाने वाली कृषि भूमि के लिए बहुत कम मुआवज़ा।

अधिग्रहण करने वाले प्राधिकरण (गेल) ने राईट टू फेयर कंपेंसेशन एण्ड ट्रांसपैरेंसी इन लैंड एक्विज़िशन, रिहैबिलिटेशन एवं रिसेटेलमेंट एक्ट, 2013 (“2013 एक्ट”’) और 2013 अधिनियम की धारा 105 (3) का पूरी तरह उल्लंघन करते हुए मुआवजे की दरें पुरानी गणनाओं के आधार पर तय कर दीं, जिनमें कृषि भूमि के उचित बाजार मूल्य को उठाकर ताक पर रख दिया गया है।

B. बलपूर्वक एवं बिना मर्जी के किया गया भूमि अधिग्रहण

कृषि भूमि का अधिग्रहण बलपूर्वक किया गया, जिसमें अनुचित और गैरकानूनी तरीके से किए जाने वाले अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों को हिंसापूर्वक दबाने के लिए राज्य की मशीनरी का उपयोग किया गया। इसके अलावा भूमि का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया में गेल ने 2013 अधिनियम के प्रावधानों तथा भूमि अधिग्रहण मामलों में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए निर्णयों को उठाकर ताक पर रख दिया

C. किसानों के मौलिक अधिकारों का हनन

भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही से पहले किसानों को अपनी बात कहने तक का मौका नहीं दिया गया। उनकी समस्याओं के निर्धारण के लिए उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। पत्र में बताई गई सुनवाई एक औपचारिकता भर थी। सुप्रीम कोर्ट ने सिंगूर जजमेंट में निर्णय दिया था कि आपत्तियों की उचित सुनवाई न होने पर भूमि अधिग्रहण की संपूर्ण प्रक्रिया निरर्थक हो जाती है।

III.         एनएचएआई द्वारा भूमि अधिग्रहण  

हम गया जिले में बुधगेरे गांव (लखनपुर पंचायत) एवं कुछ अन्य गांवों में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा कृषि और आवासीय भूमि का अधिग्रहण किए जाने से भी काफी निराश हैं। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि एनएचएआई द्वारा सड़क निर्माण के लिए बुधगेरे एवं अन्य गांवों के निवासियों/किसानों के भूखंड एवं स्थायी घरों का अधिग्रहण किया जा रहा है तथा निवासियों/किसानों द्वारा उपरोक्त A, B एवं C  में वर्णित समस्याएं निवासियों/किसानों को हो रही हैं।

                उपरोक्त तथ्यों को देखते हुए हम आपसे निवेदन करते हैं कि आप अपने अधिकार का उपयोग कर हमें आपके सामने किसानों के दुख बताने तथा बिहार में किसानों के भुगतान, पुनर्वास और पुनर्स्थापन के तरीकों पर विचार-विमर्श का मौका दें। उल्लेखनीय है कि यदि कानूनी प्रक्रिया के द्वारा किसानों की कृषि भूमि बलपूर्वक उनसे छीन ली जाएगी, तो यह हमारे संविधान के विरुद्ध होगा।

                हमें उम्मीद है कि आपका माननीय कार्यालय संवैधानिक दायित्वों का पालन करते हुए हमें आपके सामने बिहार राज्य के किसानों की समस्याएं प्रस्तुत करने तथा बिहार में किसानों को मुआवज़े के भुगतान, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के तरीकों पर विचार विमर्श करने की अनुमति देगा।

धन्यवाद,

 

 

MEMORANDUM

                                                          19th May, 2018

 

To,

His Excellency

Shri Satya Pal Malik

Hon’ble Governor of Bihar,

Dr Sri Krishna Singh Parth Road,

Rajbansi Nagar, Patna

Bihar – 800022

 

Hon’ble Sir

This is to highlight and bring to your attention the recent unfortunate and forced acquisition of agricultural land by Gas Authority of India Limited in the State of Bihar.

I. Background

The Gas Authority of India Limited (GAIL) is acquiring agricultural land in Kaimur; Rohtas; Aurangabad and Gaya Districts of the State of Bihar. It may be mentioned that the agricultural land of farmers is being acquired by GAIL under the Petroleum and Minerals Pipelines (Acquisition of Right of User in Land) Act, 1962.

II. Unlawful Land Acquisition

It is imperative that we bring to your attention, three major issues which the farmers of Bihar are facing with regard to the forced acquisition of agricultural land by GAIL in the aforementioned districts of Bihar:  

A. Extremely meager compensation for agricultural land sought to be acquired.

The Acquiring Authority (GAIL) in complete disregard to the Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013 (“2013 Act”) and Section 105 (3) of the 2013 Act, has set the compensation rates as per ancient calculations that do not reflect the true and fair market value of the agricultural land.

B. Forced and Involuntary Land Acquisition

The entire acquisition of agricultural land has proceeded in a forcible manner including the use of state machinery to inflict violence on innocent farmers protesting the unfair and illegal nature of the acquisition. Furthermore, with regard to the procedure of acquiring land, GAIL has failed to follow the provisions of 2013 Act and the judgments passed by Supreme Court in land acquisition matters, in both letter and spirit.

C. Violation of Fundamental Rights of Farmers

The Farmers have been denied a meaningful hearing before initiating the land acquisition proceedings. In effect, no proper hearing has been given to determine their grievances. The hearing in letter has only been designed as a formality. As the Supreme Court held in the Singur judgment, the absence of a fair hearing on objections vitiates the entire proceeding of land acquisition.

III.        Land Acquisition by NHAI

We are also dismayed at the similar acquisition of agricultural and residential land by the National Highway Authority of India in Budhgere village (Lakhanpur Panchayat) and certain other villages in Gaya District. It is our humble submission that the permanent homes and plots of the residents/farmers in Budhgere and other villages are being acquired by NHAI for constructing roads and the aforementioned issues A, B and C are being faced by the residents/farmers.

            In light of the above mentioned, we therefore, call upon you and the high office you hold, to allow us to present the grievances of the farmers/residents before you and discuss the way forward with compensation, rehabilitation and resettlement of the farmers in Bihar. Needless to say, it would be a subversion of the very core of our Constitution if the lands of the farmers/residents are forcefully acquired with following the due process of law.

            We sincerely hope that your office, being mindful of the sacred Constitutional obligations by which it is bound, will allow us to present the grievances of the farmers/residents in the State of Bihar, before you and thereafter discuss the way forward with compensation, rehabilitation and resettlement of the farmers/residents in Bihar.

Thanking You.

 

 

 

 

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